Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
अस्मिञ्जगति जन्तूनां जरामरणशालिनाम् ।
अजरामरणं कर्तुं संतोषोऽस्ति रसायनम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
सन्तोष ही वैराग्य में बैठाकर पुरुष को सब दुःखो से छुटकारा दिलाता हैं, इसलिए अब सन्तोष
की स्तुति करते हैं
इस जगत् में बुढ़पा और मरण से आक्रान्त जन्तुओं को अजर और अमर बनाने के लिए
सन्तोष ही एक रसायन (अमृत) है