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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

न तथोद्यानखण्डेषु पुष्पप्रकरहारिषु । विश्राम्यते वीतभयं यथा साधुसमागमे ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसी साधु पुरुष के समागम से निर्भय शान्ति मिलती है, वैसी शान्ति मनोहर पुष्पों के ढेरों से भरे उद्यानखण्डों में भी नहीं मिलती है