Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
मन्दाकिनीपयांसीव संगतानि विवेकिनाम् ।
प्रक्षालयन्ति पापानि प्रयच्छन्ति विशुद्धताम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे भगवती भागीरथी के निर्मल जल पाप
धो डालते हैं ओर शुद्धता प्रदान करते हैं, वैसे ही विवेकियों के समागम भी पुरुषों के पाप धो डालते
हैं और शुद्धता प्रदान करते हैं