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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

भेदप्रविलये जाते चित्ते चादृश्यतां गते । या स्थितिः प्राप्तबोधस्य न वाग्गोचरमेति सा ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, मैं आपसे क्या कहूँ, जब भेद हट जाता है, चित्त अदृश्य बन जाता है, तब ज्ञानी की जो स्थिति हो जाती है उसका वाणी से कथन हो ही नहीं सकता