Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
ईश्वरः को मुनिश्रेष्ठ कथं भक्त्या प्रसाद्यते एतन्मे तत्त्वतो ब्रूहि सर्वतत्त्वविदां वर ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : हे तत्त्वज्ञो मे श्रेष्ठ मुनिवर, कौन ईश्वर है ?
और वह भक्ति से कैसे प्रसन्न किया जाता है, यह बात मुझसे आप ठीक-ठीक कहिए