Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । ईश्वरो न महाबुद्धे दूरे न च सुदुर्लभः । महाबोधमयैकात्मा स्वात्मैव परमेश्वरः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे महामते, ईश्वर न तो दूरी पर ही है और न अत्यन्त दुर्लभ ही है, महाबोधरूप, एकरस अपनी आत्मा ही परमेश्वर है