Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तस्मै सर्वं ततः सर्वं स सर्वं सर्वतश्च सः ।
सोऽन्तः सर्वमयो नित्यं तस्मै सर्वात्मने नमः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
ईश्वर उसे कहते हैं; जो सबका नियन्त्रण करने में स्वतन्त्र हो, इस तरह स्वतन्त्र सबके प्रति
सभी प्रकार से अपनी आत्मा ही है, इस विषय में युक्ति कहते हैं /
सब कुछ आत्मा के लिए ही है। रथ, घर, महल आदि जितने अचेतन पदार्थ हैं, वे सब चेतन
के लिए ही हैं, आत्मा से अतिरिक्त कोई चेतनवस्तु है नहीं, इसलिए सर्वभोक्तृतारूप स्वतन्त्रता
आत्मा में ही आ गई | उसी से सब कुछ हुआ है यानी सबका कर्ता वही है, वही सब कुछ है यानी
आत्मा ही सबका उपादान और अधिष्ठान हैं, सभी ओर जहाँ दृष्टि डालें वहाँ पर वही नजर में
आता है यानी सम्पूर्ण शक्तियाँ उसी में है। वही भीतर है यानी सूक्ष्म है, वही सर्वमय सर्वगत है,
वही सनातन है, उस आत्मरूप परमात्मा को नमस्कार हो