Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
उपशान्तेन दान्तेन स्वात्मारामेण मौनिना ।
ज्ञातैवान्विष्यते ज्ञेन विज्ञानैकान्तवादिना ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अथवा कदाचित् प्रारब्धवश उन स्थानों में रह
गया, तो भी वहाँ रहकर तत्त्ववेत्ता पुरुष की ही खोज करता है, क्योकि वह पूर्णशान्त, दान्त,
अपनी आत्मा में रमनेवाला, मौनी और एकमात्र विज्ञानरूप ब्रह्म की कथा में निरत रहता है