Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सृष्टयोऽसृष्टयो ब्राह्म्यो नानाता च न नाशताः ।
अमूर्ता एव भासन्ते कल्पनार्कगणा घनाः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि अनेकता नहीं है,
अतः ब्रह्म की सृष्टियाँ भी नहीं हैं | चूँकि विनाशिता नहीं है, अतः प्रलय भी नहीं हैं, किन्तु
मूर्तिशून्य कल्पनारूपी अनेक सूर्यो की ही किरणें एकत्रित होकर यहाँ भासित हो रही हैं