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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

नेह सत्यानि भूतानि न जगत्ता न शून्यता । इदं ब्रह्माख्यरत्नेशप्रभाजालं विजृम्भितम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस संसार में न तो ये सब नाना प्रकार के जीव सत्य हैं, न यह जगत्‌-रूप सत्य है और न करीं शून्यता ही है, किन्तु ब्रह्मनामक रत्नेश का प्रभाजाल ही सर्वत्र प्रसारित है उसीका चारों ओर विलास हो रहा है