Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
चेत्योन्मुखत्वमेवान्तश्चेतनस्यास्य चेतनम् ।
उदितं तदनर्थाय श्रेयसेऽनुदितं भवेत् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य युक्ति बतलाते हैं ।
इस प्रत्यगात्मा का (साक्षी चेतन का) विषयों की ओर उन्मुख होना ही संसाररूप से बोध है।
यह अनर्थ के लिए ही उदित होता है, कल्याण के लिए उदित नहीं होता