Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अत्यर्थं शुद्धबोधैकपरिणामे कृतोदये ।
बोधाबोधार्थशब्दानां श्रुतिरप्यस्तमेष्यति ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वथा शुद्धबोधस्वरूप एक आत्मा
का सप्तम भूमिका में परिणतिरूप उदय हो जाने पर बोध और अबोधरूपी अर्थ और शब्द का
भी श्रवण समाप्त हो जाता है