Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
बोधो दृश्यदशां नैति प्राप्तो वापि च तां स्थितिम् ।
स यथास्थितमेवास्ते मनागप्येति नान्यताम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदात्मा दृश्यदशा को प्राप्त नहीं होता
अथवा विवर्तवश उस दृश्य स्थिति को यदि प्राप्त हो जाता है, तो भी वह अविकृत ही बना
रहता है । तनिक भी अन्यरूपता को नहीं प्राप्त होता