Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
सर्व एव समा जीवा वासनामन्तरेण च ।
शुष्कपर्णवदुड्डीना जडाः श्वसनवेणवः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
विचित्र तरह के शब्द करने में समर्थ होते ही हैं