Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 5, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 5, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 12
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हिन्दी अर्थ
मेरे समीप आकर बड़े आदर के साथ उसने
नमस्कार किया । मैंने भी सत्कार से उसे बैठाया । अनन्तर प्रश्न का अवसर पाकर उसने यह
अनिन्दित वचन कहा