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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 5, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 5, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

पुरा भुशुण्डः कस्मिंश्चित्पृष्ट आसीत्कथान्तरे । मया कदाचिदेकान्ते मेरोः शिखरकोटरे ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

बात बहुत पुरानी है, कभी मेरु शिखर के एकान्त कोटर में किसी अध्यात्म कथा के प्रस्ताव में श्रीभुशुण्डजी से मैंने यह पूछा था