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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 5, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 5, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । मम पूर्वं भुशुण्डेन कथितं मेरुमूर्धनि ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस विषय में विद्वान लोग इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया करते हैं । भुशुण्डजी ने बहुत दिन पहले मुझसे मेरु पर्वत के शिखरपर यह कहा था