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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 5, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 5, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

ततश्चतुर्थे कल्पान्ते विवेकस्तस्य चोदभूत् । विदूरस्येव वैदूर्यमौचित्याज्जलदोदयात् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर चौथे कल्प के अन्त में चिरकालतक तप, नियम आदि के अनुष्ठान से उसको ऐसे विवेक उदित हुआ । जैसे बादल के उदय से विदूरभूमि में वैदुर्यमणि