Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 50, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
तथैवान्यं प्रपश्यन्ति जगत्कल्पं च कल्पितम् ।
कल्पनाभासनभसो न हि संकटता भवेत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी प्रकार का कल्पित दूसरा जगत्-कल्प देखते हैं, क्योंकि
कल्पनाभासरूपी आकाश की कहीं निरवकाशता नहीं रहती