Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 50, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
भूयो जन्मान्तरगतास्त एव चिरजागराः ।
कथ्यन्ते प्रौढिमायाताः कार्यकारणचारिणः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
फिर ये जीव जब उत्तरोत्तर जन्म परम्परा लेते-
जाते हैं ओर जाग्रत्, स्वप्न एवं सुषुप्ति में विचरण करते-रहते हैं, तब वे ही चिरजाग्रत कहे जाते
हैं