Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
पदे पदविदामेव तस्मिन्बोधगतिर्भवेत् ।
द्रष्ट्रणां शान्तदृश्यानामेवान्येषां न राघव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि वह शून्यरुप नहीं हैं, तो दूसरे लोग भी एकमात्र प्रपंच का अपनाप कर उस पद में अपनी
बोधयति क्यो नहीं कर लेते इस पर कहते हैं /
हे राघव, जो तत्त्वदृष्टा हैं और जो विषयों से मुक्त हो गया हैं, ऐसे आत्मपद को जाननेवाले
मुनियों को ही उस पद में ज्ञानगति होगी, दूसरों को नहीं