Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियालोकरूपचित्तात्मसत्पदम् ।
देशकालादिशब्दार्थरहितं न च शून्यकम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि प्रत्यगात्मा ही परलोक देश, काल आदविरुप हैं; तो देश, काल आदि का बाध हो जाने पर
वह थुन्यरूप ही क्यो न हो जायेगा 2 इस पर कहते हैं ।
चूँकि देश, काल, क्रिया, आलोक, रूप, चित्त, आत्मा, सत् इन सबका अधिष्ठान तथा इन
शब्दों से बोधित होनेवाला ब्रह्म देश, काल आदि शब्दार्थो से रहित है, इसलिए वह शून्यरूप नहीं
हो सकता