Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
कारणाभावतः सृष्टिर्नोदिता न च शाम्यति ।
यादृशं कारणं वा स्यात्तादृग्भवति कार्यकम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी को समाहितद्रष्टि ओर व्यवहारद्रष्टि से जगत् जैता भासता हैं, उसे बतलाते हैं /
सृष्टि का असल में तो कोई कारण नहीं है, इसीलिए न तो सृष्टि उत्पन्न होती है और
न वह नष्ट ही होती है, यह ज्ञान ज्ञानी को समाहित दृष्टि से है और व्यवहार दृष्टि से तो
जैसा कारण का स्वरूप होगा, वैसा ही कार्य भी होगा यानी जैसा कारण कल्पित अतएव मिथ्या
है, वैसा उससे जनित कार्य भी कल्पित और मिथ्या है, ऐसा ज्ञान व्यवहारदृष्टि से भी उसे
रहता है