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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

यदि स्यात्कारणे कार्यं स्थितं कारणतास्य का । कार्यमेवोपलम्भात्तदसद्द्वयमवेदनात् ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कारण में कार्य की स्थिति होगी, तो उसकी कारणता ही कैसी, क्योंकि वह तो कार्यरूप ही ज्ञान होता है, अतः कार्य ओर कारण दोनों ही असत्‌ हैं, क्योकि दोनों का ही अलग-अलग ज्ञान नहीं हो सकता