Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
सौम्यस्यान्तर्यथाम्भोधेरूर्म्यावर्तादयः स्थिताः ।
ब्रह्मण्यसंभवक्षोभे जगच्चित्तादयस्तथा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रशान्त महासमुद्र में जैसे तरंग, भँवर आदि
स्थित हैं, वैसे ही क्षोभशून्य परब्रह्म में ये सब आपके बाह्य जगत और भीतर के चित्त आदि
स्थित हैं