Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
सर्वात्मैवामलं ब्रह्म पिण्ड एक इव स्थितम् ।
नानाभाण्डात्म हेमैव यथान्तःस्थितरूपकम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अपने भीतर अनेक बर्तनों को रखनेवाला एक ही मिट्टी का पिण्ड रहता
है, ठीक वैसे ही अनेक ब्रह्माण्डं को अपने उदर में रखनेवाला सबका स्वरूपभूत निर्मल ब्रह्म
भी एक पिण्ड ही है । जैसे अपने भीतर कटक, कुण्डल आदि आकारो से युक्त तथा नाना
बर्तनों का स्वरूपभूत सुवर्णं स्थित है, वैसे ही सुवर्णरूप ब्रह्म स्थित है