Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तस्यातो संभवादन्ये जीवभेदाः सजीवकाः ।
सर्वे न संभवन्त्येव कारणाभावविक्षताः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
कूटस्थ से
उसका यदि संभव है, तो उससे अन्य जीव सजीव हो सकते हैं, परन्तु कारण के अभाव से वे सब
निरस्त हो जाते हैं