Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

जाग्रत्येवं विचारेण स्वप्नाभे पेलवे स्थिते । क्षीयमाणे शरत्काल इवैति तनुतां रसः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

शरत्‌काल के क्षीण हो जाने पर जैसे जल स्वल्प हो जाता है, वैसे ही स्वप्न के सदृश अत्यन्त तुच्छ जाग्रत्‌ वस्तु के उक्त विचार से क्षीण हो जाने पर भोग का अनुराग भी स्वल्प हो जाता है