Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
सत्यबुद्धौ विलीनायां जगत्पश्यति शान्तधीः ।
जालद्वीपांशुजालाभमपिण्डात्माम्बरात्मकम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत्
में सत्यत्व बुद्धि के विलीन हो जाने पर शान्तबुद्धि ज्ञानी जगत् को अपिण्डात्मक आकाशरूप
देखता है, जो कि वातायन में प्रविष्ट हुए दीपकिरणों की प्रभा के सदृश प्रकाशमान भी है