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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

संशान्तान्तःकरणो गलितविकल्पः स्वरूपसारमयः । परमशमामृततृप्तस्तिष्ठति विद्वान्निरावरणः ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञानवान का अन्तःकरण शान्त रहता है, उसके विकल्प विनष्ट हुए रहते हैं, वह अपने स्वरूपभूत आत्मरस में तन्मय रहता है, परम शान्तिरूपी अमृत से तृप्त रहता है, उसको आवरण (अज्ञान) भी नहीं रहता । इस प्रकार उसकी उत्तम स्थिति होती है