Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अनाद्यन्तावभासात्मा बोध आत्मनि संस्थितः । नानापदार्थरूपेण कमूर्म्यादितया यथा ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

अनादि, अनन्त अवभासस्वरूप जो बोधात्मा है, वह अपने ही स्वरूप में स्थित होकर ऐसे नाना पदार्थों के रूप में भासता है, जैसे अपने स्वरूप में स्थित जल तरंग आदि के रूपों में