Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
कार्यकारणयोरेकरूपतैवं यदा तदा ।
कार्यकारणताभावादैक्यमेवास्मदागमः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह तो सृष्टि में भी प्रलयअवस्था की भी दुल्यन्याय से प्रसक्ति हो सकती हैं / ऐसी
स्थिति में तो प्रलय्षवस्था में स्थित अव्याकृत से कार्यरप सृष्टि की एकता होने पर कूटस्थवाद के
ऊपर आपत्ति आने लगेगी, यह कहते हैं /
ओर इस तरह जब सृष्टि मे भी प्रलयअवस्था की प्रसक्ति हो सकती है, तब तो कार्यरूप सृष्टि
की प्रलयअवस्था में स्थित उस अव्याकृत कारण के साथ एकरूपता ही सिद्ध हो गयी, क्योकि कार्य
ओर कारणभाव से एेक्य बतलाना ही तो हमारा सिद्धान्त हे, सो इस तरह सिद्ध हो गया