Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
शून्यत्वमुपलम्भत्वं यद्गतं नष्टमेव तत् ।
अन्यस्तर्हि भवेन्नाशः कीदृशः किल कथ्यताम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो
वस्तु उपलब्ध होकर भी शून्यदशा को प्राप्त हो जाती है वह नष्ट ही है, क्योकि उपलब्धिकाल में
भी उसकी असत्ता मानी जा चुकी है । हे श्रीरामजी, असत्वापत्ति का ही नाम तो नाश है । हाँ,
आपके मत में किसी दूसरे तरह का नाश होता हो, तो फिर निःसन्देह बतलाइये वह कैसा है ?