Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
सर्वं सर्वात्मकं चैव सर्वार्थरहितं पदम् ।
सर्वार्थपरिपूर्णं च तदाद्यं परिदृश्यते ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
उस आद्य पद को योगी लोग सर्वरूप,
सर्वात्मक, सम्पूर्ण अर्थो से रहित तथा सम्पूर्णं अर्थो से परिपूर्ण भी देखते हैं