Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
तवैतावन्महाबुद्धे सर्वार्थोपशमात्मकम् ।
न सम्यग्दानमुत्पन्नं संशयोऽत्र निदर्शनम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबुद्धे,
पूर्वोक्त समाधिकालपर्यन्त सम्पूर्णं अर्थो का उपशमरूप वह सम्यग् ज्ञान आपको नहीं उत्पन्न
(>) ब्रह्मस्वभावस्थिति ही अविकल्पित जगत् की भी सत्ता है, यही उन श्रुतियों का अभिप्राय हे ।
हुआ । इसमें सन्देह होना ही सबसे जबर्दस्त प्रमाण है (७)