Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
यः प्रबुद्धो निराभासं परमाभासमागतः ।
स्वच्छान्तःकरणः शान्तस्तं स्वभावं स पश्यति ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो ज्ञानी पुरुष सब दृश्यों
के आभास से निर्मुक्त, परम प्रकाशरूप को (परम साक्षात्कार को) प्राप्त है तथा स्वच्छ
अन्तःकरण एवं शान्त है, वह उस प्रकाशस्वरूप शान्तस्वभाव को देखता है