Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
भावानुष्ठाननिष्ठः सन् शास्त्रार्थैकमना मुनिः ।
भूत्वोपदेशं त्वमिमं श्रृणु श्रवणभूषणम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इसीलिए आपसे मैं कहता हूँ कि आप भी अपने चित्त की शुद्धि के अनुकूल
कर्मो के अनुष्ठान में तत्पर हो शास्त्रानुकूल अर्थो में अपने चित्त को लगाकर श्रवणभूषण मेरे इस
उपदेश का श्रवण कीजिये