Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
इयं दृश्यभरभ्रान्तिर्नन्वविद्येति चोच्यते ।
वस्तुतो विद्यते नैषा तापनद्यां यथा पयः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
यह दृश्यसमूह की भ्रान्ति ही अविद्या कही जाती है । वास्तव में
तो यह अविद्या भी ऐसे नहीं है, जैसे मृगतृष्णा नदी में जल