Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 53, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तृणगुल्माङ्कुरादीनां सत्तासामान्यमाततम् ।
यदुद्भवोद्भवं रूपं रूपं तस्य पदस्य तत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, तृण, गुल्म, अंकुर, वृक्ष आदि की उत्पत्ति होने पर साथ-साथ प्रकट हुआ जो
एकरूप से सबमें रहनेवाला अनुगत सत्ता-सामान्य रूप है यानी तृणत्व, गुल्मत्व आदि है, वही
त्व, तल्आदि प्रत्ययों का अर्थ है