Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 53, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यदकारणकं तस्य सत्ता नेहोपपद्यते ।
स्वयं नित्यानुभूतेऽर्थे कोऽत्रापह्नवशक्तिमान् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो कारण से शून्य है यानी जिसके कारण की सत्ता ही नहीं है, उस वस्तु की सत्ता यहाँ कैसे
युक्तियुक्त मानी जा सकती है ? जो स्वयं सदा अनुभूत ही वस्तु है, उसका अपलाप करने
की शक्ति कौन रख सकता है ?