Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
चिद्व्योम्नः शान्तशान्तस्य मध्यमे चैवमास्थितम् ।
जगत्तथैव सलिलमेवोर्म्यादितया यथा ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
शान्तो मे परम शान्त चेतनाकाश
का मध्य में उक्त रीति से प्रसिद्ध जो निर्विषय रूप है, वही जगत् के रूप से ऐसे भासता है, जैसे
तरंगादि के रूप से जल भारता हे