Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अतः किलास्य सर्गस्य कारणं शशशृङ्गवत् ।
प्रयत्नेनापि चान्विष्टं न किंचिदुपलभ्यते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए
इस सृष्टि का खरगोश के सींग के सदुश कोई कारण है ही नहीं, प्रयत्न से अन्वेषण करने पर
भी इसका कोई कारण नहीं मिलता