Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यदकारणकं भाति तदभातं भ्रमात्मकम् ।
भ्रमस्यासत्यरूपस्य सत्यता कथमुच्यते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो किसी कारण के बिना भासित होता हे, वह
भासित न हुआ ही भासित होता है, वह भ्रमात्मक है, यह समझना चाहिए । भ्रम तो असत्यरूप
हे, अतः उसकी सत्यता कैसे कही जा सकती है ?