Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
यथा शून्यत्वमाकाशे द्रवत्वं च यथा जले ।
अन्यतात्ममयी शुद्धा सर्गतेय तथात्मनि ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश में आकाशरूप
शून्यता अथवा जैसे जल में जलरूप द्रवत्व है, वैसे ही आत्मा में आत्ममय स्वविवर्तरूप यह विशुद्ध
सर्गता (सृष्टिरूप) है