Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 55, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 55, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 55 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

चित्काचकाचकच्यं यज्जगन्नाम्ना तदुच्यते । अत्यच्छे परमाकाशे बन्धमोक्षदृशः कुतः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

अतिस्वच्छ चिदाकाश में जो चिति का निरन्तर प्रकाशन होता है, वही तो जगत्‌-शब्द से कहा जाता है, इसलिए उसमें बन्धन और मुक्ति की दृष्टियाँ ही कैसे ?