Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 55, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 55, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 55 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
चिन्नभःस्पन्दमात्रात्म संकल्पात्मतया जगत् ।
सद्भूतमयमेवेदं न पृथ्व्यादिमयं क्वचित् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, संकल्प के स्वरूप से बना हुआ यह जगत् केवल चिदाकाश का स्पन्दनस्वरूप ही है,
अतः वह त्रिकालअबाधित ब्रह्ममय है, न कि कहीं पृथ्वी आदिमय है