Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 55, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 55, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 55 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
नेह देशो न कालोऽस्ति न द्रव्यं न क्रिया न खम् ।
सदिवाखिलमुच्छूनं वाप्यनुच्छूनमप्यसत् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
है