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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

नानाविधा नगेन्द्राणामन्तरावलिता जनैः । देशा विषमया एव निःशेषा विषयाहिभिः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

बड़े-बड़े पर्वतां के अनेक तरह के बीचवाले प्रदेश तो भील आदि जनों से वेष्टित है और वे सब विषयरूप सर्पों से दूषित होने के कारण विषमय ही है