Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तटान्यद्र्यम्बुराशीनां लोकपालपुराणि च ।
भूताकुलानि शृङ्गाणि पातालकुहराणि च ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
पर्वततट, जलतट, लोकपालों के नगर, शिखर, पातालों के कुहर आदि सब
अनेकविध प्राणियों से व्याकुल ही हैं