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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

मौनिमीनमुनिस्पर्शकम्पिनालचलाम्बुजाः । सरस्यो विरसा एव वार्यावर्तविराविताः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

तब बड़े-बड़े सरोवर ही, जिनको दक्षिणपथ में सरसी कहते है अपने तट पर समाधि के कारण होगे 2 इस पर कहते हैं / दर्प और भय से व्याकुल मौनी मीन एवं मुनियों के स्पर्श से यानी क्रीडा, स्नान आदि के अभिघात से कम्पनशील नालदण्डों के कारण चंचल हुए कमलों से युक्त सरोवर तो जलावर्तों के द्वारा शब्द (कल्लोल) करते रहते हैं, अतः वे समाधि के भंग में ही कारण हो जाते हैं, इसलिए मैं उन्हें भी नीरस ही समझता हूँ